बड़ी ही शर्मनाक स्थिति है कि आजकल अध्यापन के क्षेत्र में कदम रखने वाले इस तरह की हरकत कर इस पेशे को बदनाम करने पर तुले हैं . ..
एक बात और कहना चाहूगा कि जरा साहित्य पर दया कीजिये और मोहल्ला, भड़ास जैसे ब्लोग्स को बंद कर दीजिये ...
आशा करता हू .. सुझाव पसंद आयेगा ..
आप सभी मुझसे काफी बड़े और योग्य हैं .. लेकिन ये होते हुए मैं नही देख सकता कि मीडिया माध्यमो को बेहूदगी का अड्डा बना दिया जाए ... नाम मैं किसी के नही लूगा पर आप सभी समझदार हैं ....
आज ही अपने जन्मस्थान गाँव पोंडरी से होली मना कर वापिस लौटा हूँ । पोंडरी etah जिले का एक महत्वपूर्ण गाँव है . ये मैं अपने गाँव की तारीफ नही कर रहा हूँ . ये अपने एतिहासिक महत्त्व की वजह से प्रसिद्द है, ये फ़िर कभी बताउगा।
हमारे बृज क्षेत्र की होली का हुड़दंग अपनी अलग पहचान रखता है और प्रतिवर्ष की तरह इस वर्ष भी हमारे यहाँ एक उत्सव का आयोजन रहा। बचपन से ही मै होली के तमाम किस्से अपने बड़ों से सुनाता आ रहा हूँ जिसने मेरे दिमाग में उनके समय की होली की एक छवि बना दी है। ढोलक की dhap kee आवाज के साथ राग छेडते हुलियारे होली के रंग को दुगना कर देते थे । उन होली की यादो को मैं अपने बाबा बोहरे रमेश चंद्र शर्मा की आँखों में झलकते हुए साफ देख रहा था। होली के गायन की आवाज को सुनकर दूर-
दूर से लोग खिचे चले आते थे ये एहसास मुझे अचम्भे में दल गया था।
अपने आयोजित किए गए कार्यक्रम पर मेरा जो आत्मविश्वास था उसे बाबा की बातो ने एक पल में हवा कर दिया था । उनके लिए हमारा आयोजन सिर्फ़ बेहूदगी भरा था और कुछ नही । कुछ हद तक मै भी उनसे सहमत था।
आज हमारे होली मना के पर्याय ही बदल गए हैं। जहा सुबह जौ के दानो के साथ लोग आपस में गले मिलकर प्रेम की अभिव्यक्ति करते थे आज उसकी जगह शराब के साथ होली के दिन की शुरुआत ने ले ली है। होली का त्यौहार भी पुरी तरह से hitech हो गया है। होली के ह्य्लियारों के होली geeton की जगह अब बड़े-बड़े speakars ने लेली है। फिल्मी गीतों पर झूमआते युवा होली पर आम नजारा है। होली के मानाने पर सवालिया निशान खड़ा करता मेरे बाबा का सवाल मुझे अब भी सता रहा है।
क्या तुम्हारा यह बेहूदा तरीका सही mayano में होली का आयोजन है?
मुझे नही लगता की यह केवल हमारे यहाँ की कहानी है मै पेशे से संवाददाता हूँ और उस आधार पर ये बता रहा हूँ की होली का हम बदल चुके हैं और उसके दोषी भी हम ही हैं। कल के तमाम अख़बार होली की खबरों से रँगे होंगे और तमाम खबर हमारा मुह chidha रही होंगी।
सवाल फ़िर वही क्या हम अपनी आने वाली पीढी को एक सभ्य समाज दे पा रहे हैं।
सर्वप्रथम महान संगीतकार ऐ आर रहमान को तहे दिल से हार्दिक शुभकामनाये ।
लेकिन क्या एक भी फिल्मी हस्ती या कोई और ये कहने का भी साहस जुटा सकता है कि हम आज भी अंग्रेजो से मुकाबले में पीछे हैं । अमीर धरती,गरीब लोग पर केंद्रित पहला सेटेलाईट चैनल शुरु
अमीर धरती कहे जाने वाले छत्तीसगढ़ के पहले सेटेलाइट चैनल ज़ी 24 घंटे छत्तीसगढ़ का योग गुरू बाबा रामदेव ने कल बुधवार को विधिवत शुभारंभ किया। इस मौके मुख्यमंत्री डा रमन सिंह, पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल,विधानसभा अध्यक्ष प्रेमप्रकाश पांडे समेत जीन्यूज के आला अधिकारी मौजूद थे।राज्य के पहले सेटेलाइट चैनल ज़ी 24 घंटे छत्तीसगढ़ की शुरुआत बाबा रामदेव और मुख्यमंत्री डा सिंह ने दीप जलाकर की। इससे छत्तीसगढ़ की पत्रकारिता के इतिहास में नया अध्याय जुड़ गया जब देश के जाने माने ज़ी समूह ने यहां में रीजनल चैनल लांच किया। छत्तीसगढ़ की खबरों पर आधारित यह पहला सेटेलाइट चैनल है और ज़ी नेटवर्क का यह 35 वां चैनल है।इस मौके पर जानी मानी पंड़वानी गायिका तीजन बाई ने आकर्षक कार्यक्रम प्रस्तुत किया। सारेगामा फेम सुमेधा कर्महे ने भी ए मेरे वतन के लोगों गीत सुना कर लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया। एस बी मल्टीमीडिया के चेयरमेन सुरेश गोयल ने साफ किया कि चैनल साफ सुथरी पत्रकारिता का हमेशा ख्याल रखेगा। उन्होने कहा कि चैनल के लिए जनता का मत सर्वोपरि होगा और समस्त तथ्यों की जानकारी उपलब्ध कराएगा। उनके इरादे बुलंद हैं, उसे कोई डिगा नहीं सकता।उद्घाटन मौके पर बाबा रामदेव ने चैनल शुरू करने के लिए गोयल परिवार को शुभकामना देते हुए उम्मीद जताई कि इसमें छत्तीसगढ़ की हितों का ध्यान रखा जाएगा। उन्होंने कहा कि जिस तरह गोयल समूह ने इमानदारी और संघर्षो के साथ स्थान बनाया है, उससे साफ है कि यह चैनल भी अपना अलग स्थान बनाएगा। बाबा रामदेव ने कहा कि छत्तीसगढ़ में सृजनात्मक क्षमता है। बड़ा खूबसूरत राज्य है। प्राकृतिक संपदाओ से भरपूर यह राज्य देश ही नहीं पूरी दुनिया में अव्वल हो सकता है।मुख्यमंत्री डा सिंह ने कहा कि चैनल के लिए बधाई देते हुए उम्मीद जताई कि चैनल के शुरू होने से राज्य का खूबसूरत पक्ष भी सामने आएगा। राज्य की खबरों में ज्यादातर हिंसा और नक्सलवाद को स्थान दिया जाता है जबकि प्रदेश की पहचान लोककला, पंथी ददरिया और आदिवासी की संस्कृति के कारण भी है। आने वाले दिनों में राज्य देश को सबसे अधिक ऊर्जा देने वाला राज्य बनेगा।इस मौके पर ज़ी समूह के चेयरमेन लक्ष्मी गोयल ने कहा कि इलेक्ट्रानिक मीडिया के आने से क्रांति आई है। जहां तक समाचार पत्र नहीं पहुंच पाते, वहां भी चैनल की वजह लोगों को जानकारी मिल रही है। चैनल ने जागरूकता लाने में भी अपना योगदान दिया है। उन्होने उस दौर करते हुए कहा कि जब लोग टीवी के लिए तरसते थे। अब यही चैनल मील का पत्थर साबित हो रहे हैं।कार्यक्रम की शुरूआत में अतिथियों का स्वागत चैनल के डायरेक्टर सुरेश गोयल, राजेंद्र गोयल, दिनेश गोयल, बजरंग गोयल और पवन गोयल ने किया। कार्यक्रम में बाबा रामदेव, मुख्यमंत्री के अलावा मुख्य रूप से पूर्व केंद्रीय मंत्री रमेश बैस, पीडब्ल्यू मंत्री राजेश मूणत, प्रदेश कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष सत्यनारायण शर्मा, सांसद गिरिश सांधी और महापौर सुनील सोनी सहित बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे।
खबरों की बेहतरी की कामना के साथ आवारा बंजारा की बधाई व शुभकामनाएं
सियासत ... सौदे ........ और सवाल ?

एक बार फिर संसद शर्मसार हुई। दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र फिर से दुनिया के सामने नंगा हो कर खडा हो गया। हालांकि यह पहली बार नही की भारत की संसद में कोई शर्मिंदा कर देने वाली कोई घटना घटी हो पर जिस तरह ये सब हुआ, शायद देश हमारे नेताओं को कभी माफ़ नहीं कर पाएगा।
हुआ यह की सरकार के ख़िलाफ़ अविश्वास प्रस्ताव के दौरान लगातार विपक्ष की ओर से सरकार पर सांसदों की खरीद फरोख्त के आरोप लगे, जिसके जवाब में प्रधानमन्त्री ने कहा की सबूत पेश करें और जवाब में भाजपा के तीन सांसद लोक सभा के अन्दर आए और पूरे देश के सामने ( लाइव ) निकाल कर रख दिए नोटों के बण्डल और चिल्ला कर कहा की ये उन्हें घूस के तौर पर दिए गए।
हो सकता है की ये रूपए उनको दिए गए हो, या फिर ना भी दिए गए हों पर दुर्भाग्य ये रहा कि ये सब देश की गरिमा की प्रतीक भारतीय संसद के अन्दर हुआ। हम सब जानते हैं कि ये सब जोड़ तोड़ होती है पर शायद कभी सोचा नही था कि ये सब टीवी पर लाइव देखने पर मिलेगा।
इधर भाजपा के सांसद अमर सिंह और अहमद पटेल पर घूस देने का आरोप लगा रहे हैं तो अमर सिंह, मुलायम सिंह और कांग्रेस सफाई देने में जुट गई है .................................... टीवी चैनलों को साल का सबसे बड़ा मसाला मिल गया है और आम आदमी परेशान है कि इन लोगों को उसने देश की रक्षा और उत्थान के लिए चुन कर भेजा है ?
अभी हाल ही में एक टीवी न्यूज़ चैनल ज्वाइन किया है और आज की बड़ी ख़बर पर लोगों का चेहरा खिला है कि आज टी आर पी का दिन है पर मेरा जी कुछ भारी हो रहा है। देख कर सोच रहा हूँ कि दुनिया शायद बहुत प्रोफेशनल हो गई है। कल के दुश्मन आज के दोस्त ....... और कल के भाई आज ..................... क्या मतलब इतना मतलबी बना देता है ?
कहीं हम सब ऐसे हो गए हैं क्या ?
क्या सच हमेशा इतना ही कड़वा होता है ?
बशीर बद्र साहब के कुछ शेर याद आ गए हैं तो रख ही देता हूँ .....
जी बहुत चाहता है सच बोलें क्या करें हौसला नहीं होता ।
दुश्मनी जम कर करो लेकिन ये गुँजाइश रहे जब कभी हम दोस्त हो जायें तो शर्मिन्दा न हों ।
वो बड़े सलीके से झूठ बोलते रहे
मैं ऐतबार ना करता तो और क्या करता
कभी सोचा नहीं था कि हमारे प्रतिनिधि देश के विकास के प्रतिरोधक बन जाएँगे ........... क्या दुर्भाग्य वाकई इतना दुर्भाग्यशाली होता है ?
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"आतंकवाद"
आतंकवादीयों को मुह तोड़ जवाब ,
अखीर कब दिया जाएगा,
क्या यूँही देखते रहेंगे हम ???
और वक्त निकल जाएगा...........
भगवान ने तो बस इंसान बनाये ,
फ़िर ये आतंकवादी कहाँ से आए???
इस सवाल का जवाब कब
और किस्से लिया जाएगा .......
गुमराह करके नौजवानों को
आतंक का जहर पिलाते हैं जो
उन्हें प्रेम की धारा का अम्रत
आखिर कब पिलाया जाएगा???
जिस्म पर बम लगाकर,
हमे बर्बाद करते है जो,
उन्हें जिन्दगी का सबक,
आखिर कब दिया जाएगा???
ह्थीयारों हथगोलों से ,
खून की होली खेल रहें है जो,
उन्हें इंसानीयत का मतलब,
कब समझाया जाएगा ???
रोकना होगा हमे
इस बढ़ती हुई बीमारी को
वरना ये आतंकवाद का सांप
हम सबको डस जाएगा ..........
जब तक न छेद हो
जब तक न छेद होजल रिसता नही है
जब तक न भेद हो
किला ढहता नही है
जब तक न फूट हो
घर नही टूटता
जब तक न शुबह हो
छूटता हाथ नही है
दुश्मन को माफ करना
है अपना कतल ही
सांप से तो डसना
कभी छूटा नही है
घर अपना बचाना तो
मालिक का काम है
औरों के भरोसे तो
इसे होना नही है
घर अपना मानते हो,
बचालें इसे मिलकर
किसी एक के बस का
ये काम दिखता नही है ।

