भगवान

एक बेचारा भगवान,
कितना बोझ संभालेगा।
ये भी दे दे वो भी दे दे,
इन्सान कभी न हारेगा।
तरस आता है उपरवाले पर,
क्यों बनाया तुने इसको।
तीन ही चीजे लाता नीचे,
पेड़ पोधे और जानवर।
एक बेचारा उपरवाला,
कितनी बार उठाएगा।
उठाकर ये इन्सान अकेला,
फ़िर से ठोकर खायेगा।
हाथ उठाले यदि वो सर से,
तो क्या इन्सान रह जाएगा।
अँधेरी अपनी इस दुनिया में ,
कैसे दिया जलाएगा ।
एक बेचारा भगवान हमारा,
तब भी साथ निभाएगा ...

( a student of master of journlism)

साभार http://ajaykumarjha1973.blogspot.com

शुरू शुरू में जब यहाँ इस अंतरजाल से नाता जुडा था तो सब कुछ नया था, ऐसे में जाहिर था कि मैंने भी वही सुरक्षित रास्ता अपना रखा था। यानि चुपचाप आओ , अपना काम करो और निकल लो। उन दिनों से ,( ये सिलसिला अभी भी जारी है), जब भी अपना ई मेल अकाउंट खोलता तो दो नियमित मेले जरूर हुआ करती थी। एक वो सूचना जिसमें कि अपनी पोस्ट छपने की जानकारी दी होती थी दूसरी वो जिसमें लिखा होता था, अमुक तारीख को अंतरजाल से जुड़ने वाले इतने नए चिट्ठों का टिप्प्न्नी द्वारा स्वागत कीजिये। मैं भी ठीक वैसे ही करता था जैसे हम में से बहुत से लोग करते हैं या अब भी कर रहे होंगे। बिना पढ़े ही डीलीट कर दिया।

किंतु पिछले दिनों न जाने अचानक मुझे क्या हुआ कि मैं उन चिट्ठों को खोल खोल कर पढने लगा। सच कहूँ तो अपने आप को ही धन्यवाद कहता रहता हूँ कि अचानक वो ख्याल मेरे मन में आ गया। तब से तो मानिये जैसे ये एक आदत सी बन गयी और मैं पहला काम यही करता हूँ। यकीन मानें दिल को इतना सुकून मिलता है जब मैं किसी को पहली टिप्प्न्नी करता हूँ, या उसे फोलो करने वाला पहला व्यक्ति बँटा हूँ। न जाने कितने सारे दोस्त बना लिए हैं अब तक। कई सारी छोटी छोटी बातें जब देखने पढने को मिलती हैं तो अपने पुराने दिन भी याद आ जाते हैं, मसलन कई ब्लोग्गेर्स अनजाने में ख़ुद के ब्लोग्स को ही फोलो करने लगते हैं। किसी को ये नहीं पता होता कि अब जब उसे कोई टिप्प्न्नी कर रहा है तो वह उसे कैसे धन्यवाद कर सकता, आदि आदि। कहने का मतलब ये कि अब हमारा परिवार, हिन्दी ब्लॉग जगत का परिवार इतना बड़ा तो हो ही चुका है कि हम में से कुछ ब्लोग्गेर्स नियमित रूप से नए ब्लोग्गेर्स का स्वागत करें और उन्हें प्रोत्साहित करें। मुझे खूब पता है जब कोई नयी नयी पोस्ट लिखता है और काफी दिन बीतने के बाद भी कोई प्रतिक्रया नहीं आती तो उसे कैसा महसूस होता है।

इसलिए भाई मैंने तो ये सोच लिया है कि, बड़े भाई उड़नतश्तरी जी के पदचिन्हों पर चलते हुए नए ब्लॉगर को भरपूर समर्थन और प्रोत्साहन दूंगा, वैसे असली कारीगरी तो तब शुरू होगी, जब भगवान् की कृपा से जल्दी ही अपना कंप्युटर ले लूंगा। मेरी तो आप सबसे गुजारिश है कि नए मित्रों का स्वागत करें। यकीन मानें आपको जितनी खुशी मिलेगी उसका एहसास उन नए मित्रों को भी हो सकेगा। आशा है मेरी प्रार्थना आपको स्वीकार्य होगी.

राजनीती


राजनीती

साभार www.cartoonpanna.blogspot.com

बड़ी ही शर्मनाक स्थिति है कि आजकल अध्यापन के क्षेत्र में कदम रखने वाले इस तरह की हरकत कर इस पेशे को बदनाम करने पर तुले हैं . ..


एक बात और कहना चाहूगा कि जरा साहित्य पर दया कीजिये और मोहल्ला, भड़ास जैसे ब्लोग्स को बंद कर दीजिये ...
आशा करता हू .. सुझाव पसंद आयेगा ..
आप सभी मुझसे काफी बड़े और योग्य हैं .. लेकिन ये होते हुए मैं नही देख सकता कि मीडिया माध्यमो को बेहूदगी का अड्डा बना दिया जाए ... नाम मैं किसी के नही लूगा पर आप सभी समझदार हैं ....

होली का हुड़दंग


आज ही अपने जन्मस्थान गाँव पोंडरी से होली मना कर वापिस लौटा हूँ । पोंडरी etah जिले का एक महत्वपूर्ण गाँव है . ये मैं अपने गाँव की तारीफ नही कर रहा हूँ . ये अपने एतिहासिक महत्त्व की वजह से प्रसिद्द है, ये फ़िर कभी बताउगा।
हमारे बृज क्षेत्र की होली का हुड़दंग अपनी अलग पहचान रखता है और प्रतिवर्ष की तरह इस वर्ष भी हमारे यहाँ एक उत्सव का आयोजन रहाबचपन से ही मै होली के तमाम किस्से अपने बड़ों से सुनाता आ रहा हूँ जिसने मेरे दिमाग में उनके समय की होली की एक छवि बना दी है। ढोलक की dhap kee आवाज के साथ राग छेडते हुलियारे होली के रंग को दुगना कर देते थेउन होली की यादो को मैं अपने बाबा बोहरे रमेश चंद्र शर्मा की आँखों में झलकते हुए साफ देख रहा थाहोली के गायन की आवाज को सुनकर दूर-दूर से लोग खिचे चले आते थे ये एहसास मुझे अचम्भे में दल गया था
अपने आयोजित किए गए कार्यक्रम पर मेरा जो आत्मविश्वास था उसे बाबा की बातो ने एक पल में हवा कर दिया था । उनके लिए हमारा आयोजन सिर्फ़ बेहूदगी भरा था और कुछ नही । कुछ हद तक मै भी उनसे सहमत था।


आज हमारे होली मना के पर्याय ही बदल गए हैंजहा सुबह जौ के दानो के साथ लोग आपस में गले मिलकर प्रेम की अभिव्यक्ति करते थे आज उसकी जगह शराब के साथ होली के दिन की शुरुआत ने ले ली हैहोली का त्यौहार भी पुरी तरह से hitech हो गया हैहोली के ह्य्लियारों के होली geeton की जगह अब बड़े-बड़े speakars ने लेली हैफिल्मी गीतों पर झूमआते युवा होली पर आम नजारा हैहोली के मानाने पर सवालिया निशान खड़ा करता मेरे बाबा का सवाल मुझे अब भी सता रहा है
क्या तुम्हारा यह बेहूदा तरीका सही mayano में होली का आयोजन है?
मुझे नही लगता की यह केवल हमारे यहाँ की कहानी है मै पेशे से संवाददाता हूँ और उस आधार पर ये बता रहा हूँ की होली का हम बदल चुके हैं और उसके दोषी भी हम ही हैं। कल के तमाम अख़बार होली की खबरों से रँगे होंगे और तमाम खबर हमारा मुह chidha रही होंगी।
सवाल फ़िर वही क्या हम अपनी आने वाली पीढी को एक सभ्य समाज दे पा रहे हैं

ऑस्कर बनाम भारत

सर्वप्रथम महान संगीतकार ऐ आर रहमान को तहे दिल से हार्दिक शुभकामनाये ।


आज पूरा देश स्लमडॉग मिलेनियर को ऑस्कर अवार्ड मिलने का जश्न रहा है । साडी फिल्मी हस्तिया टी वी पर खुशी मानती नजर आ रही हैं । मुझे कोई आपत्ति नही है आख़िर खुश होने का अधिकार सबको है । लेकिन क्या एक भी फिल्मी हस्ती या कोई और ये कहने का भी साहस जुटा सकता है कि हम आज भी अंग्रेजो से मुकाबले में पीछे हैं ।



बड़े शर्म कि बात है कि जो बात हम भारतीय सोचने कि भी जहमत नही उठाते उन्ही विषयो पर कोई ब्रिटिश फ़िल्म बना देता है और वो फिल्में वर्ल्ड वाइड हिट साबित होती हैं । हम स्लमडॉग मिलेनियर को मिले आठ अवार्ड का तो जश्न मानते हैं लेकिन ये भूल जाते हैं कि आख़िर ये कम किसका है कोंन था जिसने इतना बड़ा साहस किया और इतने लोगो को जोड़ा और परिणाम हमारे सामने है।



ज्यादा समय नही हुआ जब रिचर्ड एटनबरो ने एक महान हस्ती के ऊपर एक फ़िल्म बनाई थी " गाँधी" जिसने भी आठ ऑस्कर अवार्ड जीते थे वो बी एक ब्रिटिश थे।



आखी क्या है जो हमारे फिल्मकार एक दो ढंग कि फ़िल्म नही बना पाते । सोचिये क्यों जवाब बाद में लिखूंगा.....



अंत में एक बात और स्लमडॉग बुरा शब्द नही है बुरी है हमारी सोच । बदल डालिए इसे।












अंत में मुझे अपने एक दोस्त का सवाल याद आ गया वो पूछता है कि विदेशी फिल्मो वालो को हमारी गरीबी ही दिखाई देती है फ़िल्म बनने को।? जवाब चाहता हु इसका आप सबसे... मेरा मानना है फ़िल्म बनने का सही मायना यही है कि उस विषय को चुना जाए जिसे बदलना जरुरी है....



जय हो ....

अमीर धरती,गरीब लोग पर केंद्रित पहला सेटेलाईट चैनल शुरु
अमीर धरती कहे जाने वाले छत्तीसगढ़ के पहले सेटेलाइट चैनल ज़ी 24 घंटे छत्तीसगढ़ का योग गुरू बाबा रामदेव ने कल बुधवार को विधिवत शुभारंभ किया। इस मौके मुख्यमंत्री डा रमन सिंह, पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल,विधानसभा अध्यक्ष प्रेमप्रकाश पांडे समेत जीन्यूज के आला अधिकारी मौजूद थे।राज्य के पहले सेटेलाइट चैनल ज़ी 24 घंटे छत्तीसगढ़ की शुरुआत बाबा रामदेव और मुख्यमंत्री डा सिंह ने दीप जलाकर की। इससे छत्तीसगढ़ की पत्रकारिता के इतिहास में नया अध्याय जुड़ गया जब देश के जाने माने ज़ी समूह ने यहां में रीजनल चैनल लांच किया। छत्तीसगढ़ की खबरों पर आधारित यह पहला सेटेलाइट चैनल है और ज़ी नेटवर्क का यह 35 वां चैनल है।इस मौके पर जानी मानी पंड़वानी गायिका तीजन बाई ने आकर्षक कार्यक्रम प्रस्तुत किया। सारेगामा फेम सुमेधा कर्महे ने भी ए मेरे वतन के लोगों गीत सुना कर लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया। एस बी मल्टीमीडिया के चेयरमेन सुरेश गोयल ने साफ किया कि चैनल साफ सुथरी पत्रकारिता का हमेशा ख्याल रखेगा। उन्होने कहा कि चैनल के लिए जनता का मत सर्वोपरि होगा और समस्त तथ्यों की जानकारी उपलब्ध कराएगा। उनके इरादे बुलंद हैं, उसे कोई डिगा नहीं सकता।उद्घाटन मौके पर बाबा रामदेव ने चैनल शुरू करने के लिए गोयल परिवार को शुभकामना देते हुए उम्मीद जताई कि इसमें छत्तीसगढ़ की हितों का ध्यान रखा जाएगा। उन्होंने कहा कि जिस तरह गोयल समूह ने इमानदारी और संघर्षो के साथ स्थान बनाया है, उससे साफ है कि यह चैनल भी अपना अलग स्थान बनाएगा। बाबा रामदेव ने कहा कि छत्तीसगढ़ में सृजनात्मक क्षमता है। बड़ा खूबसूरत राज्य है। प्राकृतिक संपदाओ से भरपूर यह राज्य देश ही नहीं पूरी दुनिया में अव्वल हो सकता है।मुख्यमंत्री डा सिंह ने कहा कि चैनल के लिए बधाई देते हुए उम्मीद जताई कि चैनल के शुरू होने से राज्य का खूबसूरत पक्ष भी सामने आएगा। राज्य की खबरों में ज्यादातर हिंसा और नक्सलवाद को स्थान दिया जाता है जबकि प्रदेश की पहचान लोककला, पंथी ददरिया और आदिवासी की संस्कृति के कारण भी है। आने वाले दिनों में राज्य देश को सबसे अधिक ऊर्जा देने वाला राज्य बनेगा।इस मौके पर ज़ी समूह के चेयरमेन लक्ष्मी गोयल ने कहा कि इलेक्ट्रानिक मीडिया के आने से क्रांति आई है। जहां तक समाचार पत्र नहीं पहुंच पाते, वहां भी चैनल की वजह लोगों को जानकारी मिल रही है। चैनल ने जागरूकता लाने में भी अपना योगदान दिया है। उन्होने उस दौर करते हुए कहा कि जब लोग टीवी के लिए तरसते थे। अब यही चैनल मील का पत्थर साबित हो रहे हैं।कार्यक्रम की शुरूआत में अतिथियों का स्वागत चैनल के डायरेक्टर सुरेश गोयल, राजेंद्र गोयल, दिनेश गोयल, बजरंग गोयल और पवन गोयल ने किया। कार्यक्रम में बाबा रामदेव, मुख्यमंत्री के अलावा मुख्य रूप से पूर्व केंद्रीय मंत्री रमेश बैस, पीडब्ल्यू मंत्री राजेश मूणत, प्रदेश कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष सत्यनारायण शर्मा, सांसद गिरिश सांधी और महापौर सुनील सोनी सहित बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे।

खबरों की बेहतरी की कामना के साथ आवारा बंजारा की बधाई व शुभकामनाएं

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